क्या कहा ? शुगर यानि डायबीटीज हॆ. तो भई! रसगुल्ले तो आप खाने से रहे.मॆडम! आपकी तबियत भी कुछ ठीक नहीं लग रही. क्या कहा, ब्लड-प्रॆशर हॆ. तो आपकी दूध-मलाई भी गयी.सभी के सेवन हेतु, हम ले कर आये हॆं-हास्य-व्यंग्य की चाशनी में डूबे,हसगुल्ले.न कोई दुष्प्रभाव(अरे!वही अंग्रेजी वाला साईड-इफॆक्ट)ऒर न ही कोई परहेज.नित्य-प्रति प्रेम-भाव से सेवन करें,अवश्य लाभ होगा.इससे हुए स्वास्थ्य-लाभ से हमें भी अवगत करवायें.अच्छा-लवस्कार !

15 नवंबर 2010

इन्सान का बच्चा

हमारे पडॊसी-’पंडित जी’ बडे ही विद्वान व्यक्ति हॆं.हंस-मुख स्वभाव के हॆं.हंसी हंसी में, ही कभी कभी, बहुत गहरी बात कह जाते हॆं.रविवार के दिन हमारी मित्र-मंडली अक्सर उन्हें घेरकर बॆठ जाती हॆ.पिछले रविवार को एक मित्र ने पंडित जी से सवाल कर दिया-’जानवर के बच्चे ऒर इन्सान के बच्चे में क्या फर्क हॆ’?
सवाल सुनते ही, पंडित जी के चेहरे पर मुस्कराहट दॊड गई.
हम भी टक-टकी लगाये उनके मुंह की ओर देखने लगे.
पंडित जी बोले-
“दोखो भई! कुत्ते का बच्चा,वडा होकर कुत्ता ही बनेगा-यह गारंटी हॆ.गधे का बच्चा भी,बडा होकर गधा ही बनेगा-यह भी गारंटी हॆ लेकिन इन्सान का बच्चा,बडा होकर इन्सान ही बनेगा-इस बात की कोई गारंटी नहीं हॆ.वह कुत्ता या गधा कुछ भी बन सकता हॆ.”
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4 टिप्‍पणियां:

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

इंसान जो चाहे वही कर सकता हैं ...

M VERMA ने कहा…

आप अब बड़े हो गये हैं सर आप तो ऐसा मत कहिये.
एकदम मस्त पोस्ट

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सही बात ..:):)

Roshi ने कहा…

bilkul sahi kaha panditji ne