क्या कहा ? शुगर यानि डायबीटीज हॆ. तो भई! रसगुल्ले तो आप खाने से रहे.मॆडम! आपकी तबियत भी कुछ ठीक नहीं लग रही. क्या कहा, ब्लड-प्रॆशर हॆ. तो आपकी दूध-मलाई भी गयी.सभी के सेवन हेतु, हम ले कर आये हॆं-हास्य-व्यंग्य की चाशनी में डूबे,हसगुल्ले.न कोई दुष्प्रभाव(अरे!वही अंग्रेजी वाला साईड-इफॆक्ट)ऒर न ही कोई परहेज.नित्य-प्रति प्रेम-भाव से सेवन करें,अवश्य लाभ होगा.इससे हुए स्वास्थ्य-लाभ से हमें भी अवगत करवायें.अच्छा-लवस्कार !

09 दिसंबर 2007

मेरी पूरे सात सॊ पचास हजार पॊउण्डस सटर्लिंग की लाटरी!

हे मेरे जॆसे भुक्खड ब्लागर मित्रों!
आपको यह जानकर भय़ंकर प्रस्न्नता होगी,कि आपका यह भुक्खड मित्र,(यदि बीच में किसी ने कोई पंगा नहीं किया तो)शीघ्र ही कंगले से करोडपति बनने जा रहा हॆ.फोन मिला-मिला के, पहले अपने बिग बी ऒर फिर खान भाई से बहुत कॊशिश की कि भईया कोई एक- दो आसान सा सवाल पूछ के हमें भी करोडपति बना दो,जिंदगी भर तुम्हारी फोटू के सामने अगरबत्ती जलायेंगें.लेकिन इस गरीब की किसी ने नहीं सुनी.उधर-वो गला फाड-फाडकर पूछते रहे ’कॊन बनेगा करोडपति?’इधर हम चिल्लाते रहे-भईया हमें बना दो.पता नहीं-हमारी आवाज उन तक पहुंच पाई या नहीं-ये तो राम जाने.वॆसे भी हमारे दादाजी कहा करते थे,ऊंचे लोग जरा ऊंचा ही सुनते हॆ.
खॆर!छोडिये,वो सब पुरानी बातें,अब असली मुद्दे की बात करूं.मित्रों खास खबर ये हॆ कि हमें एक ई-मेल मिला हॆ जिसमें यह दावा किया गया हॆ कि मेरी पूरे सात सॊ पचास हजार पाऊण्ड की लाटरी लगी हॆ.जब से यह ई-मेल आया हॆ मॆं फूल कर कुप्पा हो गया हूं.रात को उठ-उठकर कॆलकुलेटर से हिसाब लगाने लगा हूं कि इण्डियन करॆन्सी में ये कितने बनेंगे? राशन वाले बोरे में ये नोट आ भी जायेंगे या कोई ओर जुगाड करना पडेगा ? कई बार सोचता हूं-साला ना तो कोई लाटरी का टिकट लिया ऒर न हीं किसी कम्पीटिशन में भाग लिया,फिर ऊपर वाला हमारे ऊपर इतना मेहरबान हुआ तो हुआ कॆसे?
अब हमारी भविष्य की प्लानिंग ये हॆ कि आप सबका मुंह मीठा कराने की खातिर अपने गॆंदामल हलवाई को लड्डू बनाने का आर्डर दे देते हॆ.फिर सोचते हॆं यदि एक-दो साथी ऒर मिल जाये ,जो हमारी तरह करोडपति बनने वालों की वेटिंग लिस्ट में हों,तो मिल-जुल के ,एक ही बार में आर्डर दे देते हॆं-अरे भई!लड्डू थोडा सस्ता पड जायेगा.गॆंदामल को भी बार-बार कढाई नहीं चढानी-पडेगी.लेकिन एक बात तो हम भूल ही गये-उस ई-मेल में लिखा हॆ कि -ये लाटरी वाली बात, हमें किसी को भी नहीं बतानी हॆ.फिर ये सब हम आपको क्यों बता रहें हॆ? हो गया न पंगा! तो मित्रों,माफ करना-बस समझ लो-न तो हमने अपनी लाटरी के बारे में, आपको कुछ बताया ऒर न ही आपको कुछ पता.किसी ने सच ही कहा हॆ-’काणी के ब्याह को, सॊ जोखो.’
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6 टिप्‍पणियां:

Suresh Chiplunkar ने कहा…

टेंशन लेने का नहीं, मेरे को ऐसी दस अलग-अलग लाटरियों के मेल आ चुके हैं, और सभी से मैंने कहा है कि पहले मेरे नाम पर चेक भेजो, जब खाते में पैसे आ जायेंगे, तब उसमें से आधा तुम्हारा, बस उनके जवाब का इंतजार है, दो माह तो हो चुके... शायद उधर का कम्प्यूटर खराब हो गया होगा :)

rajivtaneja ने कहा…

सही बात है जी...अपुन को भी कई मेल आते रहे है..किसी में ब्लैक डॉलर का जिक्र होता है तो किसी में आस्ट्रेलियन लॉटरी का....
घुमा फिरा के उल्टा लेने की ही बात करते हैँ सब के सब...देने का कोई नाम ही नहीं लेता..

पट्ठे!..चैक पे मेरा नाम लिखा तक दिखा देते हैँ कि ये देखो सबूत...और भेजो कमीशन या फिर टैक्स के नाम का चैक फटाफट...

बेध्यानी को साईड में रख कर पूरा मेल ध्यान से पढो तो पता चलता है कि जो चैक का फोटो मेरे नाम का दिखाया जा रहा है वो तो सिर्फ एग्ज़ामपल मात्र है असली तो वो तब भेजेंगे जब मेरा माल उन तक पहुँच जाएगा...

बाल किशन ने कहा…

अरे इनाम विनाम तो छोडो हमका तो सिर्फ़ एक ईमेल ही भिजवा दो भइया.

Shiv Kumar Mishra ने कहा…

गेंदामल हलवाई के यहाँ आर्डर देने जायेंगे, तो मेरी तरफ से भी आर्डर दे दीजियेगा...ऐसा एक मेल मुझे भी मिला है....:-)

गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल' ने कहा…

क्या बात है भाई सा'ब
बधाई

सागर नाहर ने कहा…

विनोद जी
मेरा 1997 से इमेल खाता बना हुआ है और उस पर १० सालों में इस तरह की जितनी मेल आई है वे सचमुच सत्य होती और मुझे पैसा मिला होता तो अब तक दो चार अमरीका तो मैं खरीद चुका होता.. :)

ठग्गू कहीं के